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Showing posts from 2017

तुम रूह में

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Tum hi to ho bas

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तुम नाराज़ तो नही होगी

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तुम नाराज़ तो नहीं होगी 

Jindgi ek falsafa

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Meri dohari jindagi

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प्रकृति और हम

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प्रकृति प्रतीक है हमारे संस्कारों की  प्रकृति झलक है हमारे स्वभाओं की, प्रकृति जीवन की सुन्दर धरा है हमारे रहन-सहन की ये एक विरल कला है  जान ले जो प्रकृत की रहस्यों को संभाल लेगा हर मुश्किल से वो खुद को जीवन रूपी वृक्ष में सदा ये रहा है तुम जी लो जिंदगी सुकून से  इसने यही बस कहा है यही बस कहा है पुण्य प्रकाश त्रिपाठी एक सोच

अर्थ की दहलीज

*स्वरचित* "संघर्ष आसान नहीं है, उसमें इतनी निराशाएँ होती रही हैं, फिर भी वही एक उम्मीद है, वही आग है, वही लौ है, वही अर्थ की दहलीज़ है।" *पुण्य प्रकाश त्रिपाठी*      *प्रदेश प्रवक्त...

खामखाह मौत से डर रहा हूँ मैं

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Jindgi ek jang hai

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