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Showing posts from October, 2016

माँ

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Ma hi sab kuchh hoti hai

एक एहसास

एक एहसास उनकी एक मुस्कराहट जैसे  चाँद कि दुधिया रौशनी में  किसी तितली की प्रतिछाया हो  कितना मनोरम है ...... ये दृश्य  कितना निश्छल है इनका स्नेह  न व्यक्त होता है न अभिव्यक्त न लेखनी से न ही तुलिका से एक एहसास है दिल में उनका हर पल जैसे उनकी आहट सी है साथ  वो जैसे मेरे कानो में कुछ कह रही है जिसे सुन मै मंत्रमुग्ध हो रहा हूँ  भावविभोर हो रहा उनका एक मीठा एहसास अंतर्मन को प्रफुल्लित कर रहा है उनकी एक मुस्कराहट जैसे मुझे चाँद कि दुधिया रौशनी में जीने का एक नया एहसास  दे रहा...!

सृष्टि की रचना

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एक पत्रकार जीवन

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वो दर्द ही कुछ ऐसा है न कह सकते न छुपा सकते।।