एक एहसास



एक एहसास


उनकी एक मुस्कराहट जैसे 
चाँद कि दुधिया रौशनी में 
किसी तितली की प्रतिछाया हो 
कितना मनोरम है ...... ये दृश्य 
कितना निश्छल है इनका स्नेह 
न व्यक्त होता है न अभिव्यक्त
न लेखनी से न ही तुलिका से
एक एहसास है दिल में उनका
हर पल जैसे उनकी आहट सी है साथ 
वो जैसे मेरे कानो में कुछ कह रही है
जिसे सुन मै मंत्रमुग्ध हो रहा हूँ 
भावविभोर हो रहा
उनका एक मीठा एहसास अंतर्मन को
प्रफुल्लित कर रहा है
उनकी एक मुस्कराहट जैसे मुझे
चाँद कि दुधिया रौशनी में
जीने का एक नया एहसास  दे रहा...!

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